Click here to Install JAINAR APP.

पुरस्कृत कहानी - लक्ष्य की दीपावली


जय जिनेन्द्र सभी को ।
मेरी यह कहानी पसंद आये तो जरूर से लाइक और कमेंट दें

.

 

 

       लक्ष्य की दीपावली 

 

             

 

 दिपावली में अभी दो दिन शेष थे । आठ साल का लक्ष्य अपनी बालकनी में गुमसुम बैठा था और बिल्डिंग के सारे बच्चों को नीचे फुलझड़ी व बम पटाखे चलाते हुये देखकर ,उसे अपनी पिछली दिवाली याद आ रही थी ।कैसे उसने पिछली बार अपने पापा के साथ फुलझडि़यां और गोल चकरी चलायी थी ।लेकिन इस बार वह चाह कर भी यह नहीं कर पा रहा था क्योंकि उसके पापा हैदराबाद में नहीं थे और उन्हें ऑफिस के काम से दिवाली के त्यौहार पर कनाड़ा जाना पड़ गया था।

  लक्ष्य की मम्मी आशा को यह बिल्कुल भी पसंद नहीं था कि उसका बेटा किसी भी तरह की आतिशबाजी करे लेकिन लक्ष्य के पापा के आगे उसकी एक नहीं चलती थी ।अपने पापा की मौजूदगी में वह अपनी जिद मनवा लिया करता था।

आखिर आशा को आतिशबाजी पसंद भी कैसे हो, इन्हीं बम पटाखों की वजह से बचपन में ही आशा ने अपनी मां को खो दिया था ।यह सोचते ही उसकी आंखें भर आयी ।वहीं वह अपने बच्चे को खुश ना देखकर दुखी भी थी लेकिन वह ये भी तो नहीं चाहती थी कि उसका बेटा कोई ऐसा काम करे जिससे पर्यावरण को नुकसान हो, प्रदूषण बढ़ता हो और पशु-पक्षियों को भी चोट पहुंचती हो ।वह यह भी जानती थी कि मां होने के नाते यह उसी का फर्ज़ है कि अपने बच्चे को आतिशबाजी के नुकसान बता सके ।

इसके लिये आशा ने एक युक्ति सोची । दिवाली के दिन सवेरे जल्दी उठकर उसने अपनी बिल्डिंग में हर घर के आगे अलग -अलग स्लोगन लिखे पोस्टर लगा दिये ।"don't crack fires ", "पर्यावरण को बचाना है ,आतिशबाजी को भगाना है" , "सबके सपनों को करो साकार ,आ गया दिवाली का त्यौहार", दिवाली तो मनायेंगे ,पर प्रदूषण नहीं फैलायेंगे ", " पटाखे नहीं चलायेंगे ,इससे पैसों को बचायेंगे ,हर गरीब के घर में,

खुशियों के दीपक जलायेंगे", ।

पहली बार की गयी इस तरह की नयी पहल से बिल्डिंग के सारे बच्चे व बड़े लोग बहुत खुश थे।सब लोगों ने मिलकर इसका पूरी तरह से समर्थन किया ।आशा के इस प्रयास की हर कोई तारीफ कर रहा था।

अब लक्ष्य भी अपनी मम्मी की तारीफ सुनकर बहुत खुश हो रहा था।उसका चेहरा गर्व से दमक रहा था।

       अब जो भी बच्चे अपने जितने पैसे पटाखे खरीदने में खर्च करने वाले थे, उन सबने उन पैसों को

अपने अपार्टमेंट के दान राशि बॉक्स में डाल दिया।इकट्ठे किये गये पैसों से सबने भोजन सामग्री व मिठाईयाँ खरीदी और एक अनाथालय में जाकर बच्चों के बीच वितरित की ।उन बच्चों के साथ सभी लोगों ने अनाथाश्रम मेंं दीपक भी जलाये व माता लक्ष्मी की पूजा की ।अपनी उम्र के अनाथ व छोटे बच्चों को खाना खिलाकर लक्ष्य व उसके सारे दोस्त बहुत ही खुश थे।अब उन्हें दिवाली का असली उद्देश्य समझ आ गया आखिर उनके किये पैसों की बचत से आज अनाथ बच्चों की दिवाली रोशन हो गयी ।

आगे से सब बच्चों ने बम पटाखे नहीं चलाने का वायदा किया

   स्वाती संदीप जैन

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

1206 Views

Comments